Tag: तज़मीन बर तज़मीन

विधा: तज़मीन बर तज़मीन…

(अपनी ही तज़मीन जनाब नक्श लायलपुरी साहिब ग़ज़ल “ये मुलाक़ात इक बहाना है… प्यार का सिलसिला पुराना है” पर)…. प्यार में हर कोई दीवाना है…नींद से जागना जगाना है….चाँद …