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विधा: तज़मीन – ग़ज़ल जनाब नक्श लायलपुरी साहिब … “ये मुलाकात इक बहाना है…”

इश्क़ जन्नत, अदू ज़माना है…इसका सदिओं रहा फ़साना है…रोज़ हर इक नया तराना है…“ये मुलाकात इक बहाना है..प्यार का सिलसिला पुराना है….” भूल कर भी न हम भुला पाएँ…हर …