Tag: ढल रही है जिंदगी धीरे धीरे –

धीरे-धीरे — डी के निवातिया

भोर की चादर से निकलकरशाम की और बढ़ रही है जिंदगी धीरे धीरे  !योवन से बिजली सी गरजकरबरसते बादल सी ढल रही है जिंदगी धीरे धीरे !खिलती है पुष्प …