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गुनाहग़ार – डी के निवातिया

गुनाहग़ार!मानता हूँ इस बात के लिए मैं गुनाहग़ार हूँ,तेरे अनमोल दो घडी वक़्त का तलबगार हूँ,कोई असीम दौलत तो नहीं मांगी थी तुझसे,फिर क्यों तेरी नज़रो में हुआ मैं …