Tag: गुनाह

दर्द मुझसे मिलकर अब मुस्कराता है

दर्द मुझसे मिलकर अब मुस्कराता हैबक्त कब किसका हुआ जो अब मेरा होगाबुरे बक्त को जानकर सब्र किया मैनेंकिसी को चाहतें रहना कोई गुनाह तो नहींचाहत का इज़हार न …

गुनाह—गजल-नज्म— डी. के. निवातिया

क़त्ल न कोई गुनाह किया हमने !बस दर्द ऐ दिल बयाँ किया हमने !! जाने क्यों नुक्ताचीनी होने लगी !जरा लबो को जो हिला दिया हमने !! देखे लिये …