Tag: ग़ज़ल – सलीम रज़ा रीवा

बुलन्दी मेरे जज़्बे की – salimrazarewa

बुलन्दी मेरे जज़्बे की ये देखेगा ज़माना भीफ़लक के सहन में होगा मेरा इक आशियाना भीअकेले इन बहारों का नहीं लुत्फ़-ओ-करम साहिबकरम फ़रमाँ है मुझ पर कुछ मिजाज़-ए-आशिक़ाना भीजहाँ …

ग़मों की लज़्ज़त चुराके लेजा – सलीम रज़ा रीवा

.Nov18ग़मों की लज़्ज़त चुराके लेजा मेरी मसर्रत चुराके लेजाया ज़ौक़-ए-उल्फ़त चुराके लेजा या दिल की हसरत चुराके लेजाooक़दम क़दम पर उजाला बन कर ये साथ देंगी तेरा हमेशामेरी सख़ावत …

सबसे छोटा क़ाफ़िया, और सबसे लंबी रदीफ़ की ग़ज़ल – SALIM RAZA REWA

जब, तुम्हारी मोहब्बत में खो जाएंगे बिगड़ी क़िस्मत भी इक दिन संवर जाएगीलब, तुम्हारी मोहब्बत में खो जाएंगे बिगड़ी क़िस्मत भी इक दिन संवर जाएगीooतुम मेरे साथ हो,चांदनी रात …