Tag: क्रांति पर कविता

ओम पूरी जिन्दा हैं…

मेरे बाथरूम मेंएक अनोखा प्रयोग चल रहा है/दरवाज़ा बन्द कर के/घण्टों बैठा रहता हूँ.. घुटन की साँस लिए/हर रोज़सोचता हूँ “आज क्या मैं ईमानदार नहीं रहा ?”(जो कि सरेआम …