Tag: कुण्डलिया छंद

कुण्डलिया छंद – डी के निवातिया

कुण्डलिया छंद *** मात  दात्री जन्म की , पिता जीव आधार। धरा  गगन के  मेल से, अदभुत  ये संसार।। अदभुत ये संसार, गजब कुदरत की माया। पल में बदले …

बेच रहे हैं अंग….

चीनी जिससे हैं डरे, करते क्या-क्या ढोंग.अभ्यासी वह वर्ग है, पावन ‘फोलुन गोंग’.पावन ‘फोलुन गोंग’, सरलतम जीवनशैली.करते योग निरोग, वैश्विक प्रतिभा फ़ैली.उन पर अत्याचार, करें आजादी छीनी.छीन बेचते अंग, …

मन….सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…..

मन गोरी का महकता, कमर मटकत नाहीं….राख गगरी सर उसने, कमर लियो मटकाए….कमर लियो मटकाए, सब ससुरा पागल भयो…होश बिसरि देखि जो, घरवाली ने धर लियो….कह ‘चन्दर’ कविराय, जो …