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किनारा – डी के निवातिया

किनारा मझदार में टूटी कश्ती को किनारा नहीं मिलता,मन के अंधेरों में खोये को,उजियारा नहीं मिलतासंभलकर चल राही, अपने वक़्त को पहचानकरबीता हुआ लम्हा जिंदगी में दोबारा नहीं मिलता …

तुम्हारे बिन मुझे मेरा सहारा भी नहीं मुमकिन

नफे की बात क्या करना खसारा भी नहीं मुमकिन, तुम्हारे बिन मेरा इक पल गुज़ारा भी नहीं मुमकिन l अगर तुम साथ रहते हो तो दुनिया साथ रहती है, …