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काहे भरमाये — डी के निवातिया

काहे भरमाये *** काहे भरमाये, बन्दे काहे भरमायेनवयुग का ये मेला हैबस कुछ पल का खेला हैआनी जानी दुनिया केरंग मंच पे नहीं तू अकेला हैमन मर्जी से सब …