Tag: कवि

कभी ग़म तो कभी खुशी

हार रहा हूँ मैंकवि लगातार विपल होने पर उदास होकर कहता हैहार रहा हूँ मैंटूट रहा हूँ मैंपिघल रहा हूँ मैंजाने कितने दिलों सेनिकल रहा हूँ मैं।हर बार है …

तुम परी तो नहीं !

कहीं तुम परी तो नहींसुंदर रूप, नयन छोटे सेचेहरे पर लाली है छायी,जुल्फों का यूं, हवा में उड़नाजैसे काली घटा है आई।ओठों पर मुस्कान है ऐसे जैसे फैली हो …

कवि – दोहे – डी के निवातिया

कवि लिख लिख रचना कवि भये, मांगे सबका प्यार !खुद न  किसी  को  भाव  दे, बन कर रचनाकार !! नवयुग का आधार है, करते मन की बात !सबका चाहे …