Tag: औचित्य कुमार सिंह

पलायन

विवश कीट से, पैर हजारोंवापस घर चलते हैं।रोटी पानी की ठोर नहींअपना भी कोई और नहींथोड़े जो सिक्के मिलते थेवैसा भी यह दौर नहीं।लौट लौट कर चकाचौंध सेसपनों की …