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औक़ात – डी के निवातिया

औकात ! कोई कितना भी रसूखदार क्यों न हो कोई कितना भी मालदार क्यों न हो, औक़ात खुद के लिए कफ़न की नहीं, कोई कितना भी दानदार क्यों न …

मेरा ये हुक्म है सांसों:: आनंद सागर

ताज़ा गज़ल- मेरा ये हुक्म है सांसों::Er Anand Sagar Pandey मेरा ये हुक्म है सांसों कि एहतियात रहे, वो रहे ना रहे ता-उम्र उसकी बात रहे l वो क़मर …