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मेरे दर्द से तुम वाकिफ़ तो नहीं

मेरे दर्द से तुम वाकिफ़ तो नहींवो गलिया अब मुनासिब तो नहींमेरी किस्मत में ना था ख़ुशी का किनाराये ग़म कि दुनिया ख्वाहिश तो नहींमेर दर्द से तुम वाकिफ़ …