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कविता_ “हम एक नाव पर सवार है”

हम एक नाव पर सवार हैं, मन में भरा क्यूँ इतना गुबार है;ना करो गुस्ताखियां ऐसी यहाँ, जाना तो सभी को उस पार है;क्यों बाँट रहे हो तुम इनको, …

एक ख्याल — डी के निवातिया

एक ख्याल ***@*** अक्सर मेरे घर आने से कतराने लगे हैमेरे अपने चाहने वाले लोग  क्योकि झुकना उनकी शान के खिलाफ है इधर मेरे घर की चौखट छोटी ठहरी …