Tag: आवारापन पर कविता

आवारा भटकता फ़िर रहा हूँ

आवारा भटकता फिर रहा हूँ मैं,जाने क्यों उनकी यादों में।इस तरह यह ज़ीवन आधा गुजारा ,आरज़ू भी करते हैं ,फरियाद करते हैं।मैं हूँ एक ऐसा बेचारा !इस जहाँ में …