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आया था चाँद पानी पर

कवि: शिवदत्त श्रोत्रियकिसी ने उपमा दी इसेमहबूबा के चेहरे की,किसी ने कहा ये रात का साथी हैकभी बादल मे छिपकरलुका छिपी करता तो ,मासूम सा बनकर सामने आ जाता …