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आँसू छंद “कल और आज”

आँसू छंद “कल और आज” भारत तू कहलाता था, सोने की चिड़िया जग में। तुझको दे पद जग-गुरु का, सब पड़ते तेरे पग में। तू ज्ञान-ज्योति से अपनी, संपूर्ण …