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*अब सरदी की हवा चली है*

*अब सरदी  की हवा चली है* …आनन्द विश्वास अब सरदी  की हवा चली है,गरमी अपने  गाँव  चली है। कहीं रजाई या फिर कम्बल,और कहीं है  टोपा  सम्बल।स्वेटर  कोट  सभी  हैं  लादे,लड़ें  ठंड   …