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अन्तर्यामी

तेरी धुन बिन सृष्टिबहुत प्यासीतुझे नाम क्या दूँघट-घट वासी |नीतिनिधान हेरथचालककरुणावतार, प्रभुप्रतिपालक |मीरा मोहतुझपर हारीहे मोर मुकुटबंशीधारी |हे चित्तचोरदयासागरकेशव,नाथभटनागरहे श्याम,मोहनभगवाधारीगोविन्द,सुदर्शनचक्रधारी |हे नाथगोवर्धन उठा दो तुमशंख फूको औरजगा दो तुम …