Author: vivek virendra pathak

नारी महिमा

हो दया की सागर , हो सुंदरता की आगार\ नारी की महिमा अपरम्पार है जानता पूरा संसार सृष्टि की हो तुम आधार नदियों जैसा अनवरत बहना , अपने गंतव्य …