Author: Vikram jajbaati

बेवजह तो नहीं – विक्रम जज़्बाती

तेरी ख़ामोशी तेरी नाराज़गी सब कुछ सहीतेरा मुझसे यूं बातें करना बेवजह तो नहीं तन्हा रात बीती तन्हा दिन माना वो भी सहीमगर शाम तक इंतज़ार तेरा बेवजह तो …

आरज़ू- विक्रम जज़्बाती

तारा चांद से रात में शिकवे शिक़ायत करता है ।अपने के टूटने का ग़म बयां वो करता है ।इन्हीं चांदनी रात में ‘जज़्बाती’ माहिया गाता है ।टूटते तारे से …

बेखौफ

ज़बान-ए-तेग़ से कटता रहा शज़र दिल मेरामेरे अरमानों के परिंदों को बेघर होने का डर नही ।ज़बान-ए-तेग़-तलवार जेसी शब्द जो तकलीफ दे जाए ।शज़र-पेड Оформить и получить экспресс займ …

अब कि होली पाक में-विक्रम जज्बाती

नरसिंघ का रुप धरो ,वार करो तुम छाती पर ,गद्दरौ कि चीख गुंजा दो घाटी के हर कानो में ।विनय कि वीणा बन्द करो, युध्द का शंखनाद कर ,होली …

जख्मी परिंदे

परिंदे जख्मी मिलते है राहो चौराहों पर, पर चौराहों पर भीड़ है जिंदा लाशों और दरिंदों कि, की दरिंदों ने साज़िश है फ़िर हुए जख्मी परिंदे ,परिंदे जख्मी मिलते …

साम्प्रदायिक हृदय

धर्म उन्माद मे भटके युवाओं को धर्म निरपेक्षता का सही अर्थ समझाता ,नागरिक भारत का,एक धर्म मेरा भी ,पर इंसानियत इंसान को ही बताता ।ये जज्बाती इंसान ढूंढ़ता है …

याद रही या भूल गया

जनवरी-फेबवरी याद रही,चैत्र-बैशाख भूल गया ,हम मतलबी इंसान अपनो का हाल पूछना भूल गये ।तारिक बदलना याद रही,बिगड़ी सीरत सुधरना भूल गये ,मशरूफ़ हुए खुद मैं ऐसे,फौजी को जय …

अमर भगत सिंघ

नमन शहीदे-ए-आज़म तुम्हे ,जो लहू से इस देश को सींच दिया ।बेहरी अंग्रेजी हुकूमत को ,बम धमाके से हिला दिया ॥इंकलब का नारा अस्सेम्ब्ली से देश भर मैं गुंजा …