Author: vijaykr811

प्रेम मुजरिम :-विजय

जिंदगी की आग मेंझुलसता रहा हूँ मैंतेरी प्रेम की बारिश काबहुत इंतजार किया हूँ मैंडर है मुझको तुझे खो न दूँ मैंकारण इस डर केखता कर गया हूं मैंतेरे …

नवजात परी:-विजय

जान है तू एक नन्ही सीजान बन गयी पापा-मम्मी कीकरती जब-जब तू किलकारी झूम उठे सब आंगनबाड़ी लगती तू गुड़िया रुई की नाजुक तू छुईमुई सीहोठ तेरे जैसे फूल-पंखुरीगाल …

प्रतिशोध :- विजय

कब तक पठानकोट,कब तक उरीकब तक सहेंगे पुलवामाअब तो जागो हे पुरूषोत्तमकरो आतंकरूपी रावण का खात्माभाता नही अब छोटी सर्जरीन भाता अब कोई वार्तानाम पाकिस्तान का इस धरती सेअब …

बेरुखी पर दिल:-विजय

लग चुका है अपनों के खंजरन जाने कितने हमारे पीठ परहर दर्द सहकर भी है काबिजमुस्कुराहट अबतक हमारे होंठ परहो चुके है सब गैर अपनेरिश्ते टिके थे हमारे नोट …

गुनहगार:-विजय

लुट रही थी आबरू जबतब कहाँ थी वो टोलियाँअपने पालतू के खरोंच परचलवा देते थे जो गोलियांकौन थे वो तानाशाहीकौन थे वो मंत्रियांजिनके कहने पर सरदारों केगर्दन पर चल …

विश्वासघात:-विजय

रखा है जिसने ईमान यहाँ पेजल्द रुखसत हुआ वो जहाँ सेसुनती है दुनिया बेईमानो कोबाकी के लिए बहरे है यहाँ पेअपनो के लिए कभी जो लुटे थेएहसास वो करते …

जमाना कैसा:-विजय

सत्ता पर चोरो का राज हैसाधु करते अब व्यापार हैझूठ यहाँ बड़े काम की हैइंसानो की बस्ती नाम की है मजहब-जाति में बटें लोग हैंअराजकता का शोर हैइबादत खुदा …

निर्भया:-विजय

नर होकर भी मन मेरारात जागते करूँ सवेराजिधर सुनो चीत्कार मचा हैसरेआम भेड़िया नाच रहा हैखुले घूम रहे है अब रावणचीर हर रहे हर गली दुस्सासनइससे भी न भूख …

नया साल:-विजय

नए साल ने ली अंगड़ाईबांटो प्यार भूलो लड़ाईअपने देश-समाज को हम प्रेम-राह पर ले चले सब भाई जाति-धर्म की बात न करनानववर्ष में सब मिलकर रहनाखूब खिलाना सबको मिठाईन …

ढूंढता हूँ:-विजय

फ़ना हो जाऊँ इश्क़ मेंऐसा सनम ढूंढता हूँगुम हो जाये पहचानऐसा नयन ढूंढता हूँतिनको में बिखेर दे दिलवो आँचल का हवा ढूंढता हूँकैदी हो जाये दिलवो दिल-जंजीर ढूंढता हूँतरसे …

ये कैसी आज़ादी:-विजय

जो मांग रहे हो तुम आज़ादीफिर लेते क्यूँ नही आज़ादीघर-बाहर आग लगाकर तुमदेश की कर रहे क्यूँ बर्बादीसविंधान की बात करने को आदीखुद ही क्यूँ बन बैठे तुम बागीरक्षा …

देखा है:-विजय

चांद से भी खूबसूरत मैंने चांद देखा हैसूरज से भी गर्म दिल का आग देखा है कश्तियां डूबा नही करती अक्सर जहाँउस किनारे जिंदगी की कश्ती डूबा देखा हैआवारो …

उम्मीद-ए-खाख:-विजय

करने चला था घर को रोशनअपने उम्मीदों के चिराग सेजला गए मेरे वो सारे आशियाँबस धुंध बचे है मेरे मज़ार पे तमन्ना थी कुछ कर गुजरने कीगुजर गयी जिंदगी …