Author: vijaykr811

दरवाजा बंद कर लो:-विजय

न कोई आए, न कोई जाएखुद को घर मे बन्द कर लोदरवाजा बंद कर लो-2मन न लगे,बैचेनी लगेबात अपनो संग कर लोदरवाजा……..घर मे ही रहना,न बाहर निकलनाहै ये एक …

दुर्योधन:-विजय

महत्वाकांक्षा के अम्बर सेधरती पर गया वो गिरसूचक था अन्याय कागया मिट्टी में वो मिलअपने कर्त्तव्य से विमुखद्वेष से था गया वो घिरधर्म-अधर्म की बात न जानीकृष्ण से था …

कर्ण-अर्जुन:-विजय

आमने-सामने थे दो भाईधर्म-अधर्म की थी लड़ाईपास एक का था गांडीव बाणों की बौछार चलाईधरती से स्वर्ग लोक तकदी धनुष की टंकार सुनाईदो वीरो के युद्ध देखकरभूमि कुरुक्षेत्र की …

अभिमन्यु:-विजय

रथ-पहिया बना जिसका चक्र सुदर्शनदेखें सब हतप्रभ उसका वीर प्रदर्शनन कोई था युद्ध मे उसका सानीवीर अभिमन्यु के न होंगे अब दर्शनथा रणभूमि में लड़ता रहा वो अकेलातोड़ा चक्रव्यूह …

महाभारत:-विजय

गांडीव तू उठा के,शंख को तू बजा केवध उनका तू कर देजिसने चीरहरण किया हैजिह्वा उनकी तू सी देअपने बाणों की सूत सेजिसने भरी सभा मेंनारी को वेश्या कहा …

जिम्मेदारी:-विजय

विपदा की घड़ी ये आई हैकोरोना से मची तबाही हैजन-जन ने अब ये ठानी हैकोरोना को मार भगानी हैयह युद्ध बहुत दूरगामी हैभिन्न चरणों में इसे निभानी हैदूरी शारीरिक …

असभ्य नागरिक:-विजय

कब हम गन्दा गंगा करेंगेकब हम दूषित हवा करेंगेकब हम सबसे झगड़ा करेंगेकब सड़क पर कचड़ा करेंगेकब यहाँ-वहाँ पर हम थूकेंगेकब शोरगुल के गीत बजेंगेकब खुले में सब शौच …

भक्त-चमचे:-विजय

कोई बार-बाला के पीछे पड़ा हैकोई चायवाला के पीछेदहलीज पे मौत खड़ी हैइनको बस राजनीति सूझेपढ़े-लिखे युवा हो या फिरअनपढ़ देश के छोरेसब मिलकर ज्ञान बाच रहेकौन है देश …

मैं:-विजय

कातिल हूं मैं अपने जीवन-मन कासाहिल हूं मैं इच्छाओं के समंदर काबेड़ियां हूं मैं अपने बढ़ते हुए कदम काटूटा तारा हूं मैं अपने ही तारामंडल कारावण हूं मैं अपने …

कोरोना की बारी:-विजय

न जाना है सरहद परन करनी है गोलीबारीघर मे ही रहकर है करनाअपने देश की रखवालीकर ली है हमने पूरी तैयारीदूरी में रहना है होशियारीजंग जीतेंगे मन में है …

कब:-विजय

सविंधान बचाने निकले थेदेश बचाने कब निकलोगेदीन की चिंता करनेवालेदीन का सुध तुम कब लोगेबिरयानी की दावत देने वालेभूखे को रोटी कब दोगेदेश को तुम जगाने वालेनींद से खुद …

कोरोना प्रकोप:-विजय

पंछी आज हैरान हैक्यूँ शहरें सुनसान हैपिंजरों में जो रखते थेखुद कैद क्यूँ इंसान हैजानवर भी सोच रहेसड़कें क्यूँ वीरान हैचीख-पुकार जो करते थेखुद खामोश क्यूँ इंसान हैसड़के आज …

कोरोना खेल:-विजय

खुद ही जेलर,खुद ही कैदीखुद का घर है जेलदेखो कोरोना खेल रहा हैकैसा अद्भुत सा अब खेलचोर-सिपाही, लूडो, कैरमथे भूले सब ये खेलघर बैठे जन-जन खेल रहेअपनो संग अब …