Author: UDAYPRAKASH DWIVEDI

यह गरीबी का रेगिस्तान है जनाब-उदयप्रकाश द्धिवेदी

यह गरीबी का रेगिस्तान है जनाबयहाँ नंगे पाँव चलना पड़ता हैकोसों दूर अपनों को चलना पड़ता हैनजाने कितने युगों की अतृप्त प्यास हैलोगों में आज भी नयी जिंदगी की …

भर-पाक बना रखा है-उदयप्रकाश द्धिवेदी

बेवजह की ताक़त में लोग दुश्मन बना बैठे हैं,दोस्त न सही लेकिन इंसानियत सजा रखें हैं,अज्ञात भीड़ में खुद को छुपा रहे हैं,विचारविहीन हो वाणी चला रहे हैं।जानकर भी …

मेरे अटल —  उदयप्रकाश द्धिवेदी

मेरे अटल —  उदयप्रकाश द्धिवेदीपरमाणु  का  एक  अणु भी  रो  बैठा  अरसों  बादअटल  जीवन  का  अटल  सत्य  है  वीर  न  जाते  खाली  हाथएक  विवशता , एक  विषमताहुआ  अश्रुमय  मेरा  …