Author: Tribhuvan Nath

मुक्तक

अपनो से अपनो का पोषण होता है। अपनो से अपनो का शोषण होता है। अपनो में ही छुपे हैं शञु मिञ,  अपनो में ही धर्मराज, दुर्योधन होता है।।   Оформить и получить …