Author: डॉ सुशील उपाध्याय 'विमल'

हिंदी दिवस २०२०

भावों की अभिव्यक्ति का करती विधान  है आर्य-भूमि की संस्कृति का शाश्वत-प्रमाण है         माला की मणियों-सा जिसने हमें पिरोया             …

शिक्षक

शिक्षक जो अपने जीवन के कर्णधार हैं उनको हमारा प्रणाम बारम्बार है   अंदर दे सहारा हैं बाहर करें चोट जो एक-एक कर सब दूर करें खोट वो शिक्षार्थी …

पंद्रह अगस्त

बिन मान बने मेहमानों कोअपने घर से जब किया विदाउन्मुक्त-गगन,स्वछन्द-धरास्वाधीन -मेखला हुई यदाजिसमें न सूर्य कभी डूबाउसका जब सूरज हुआ अस्तआया स्वर्णिम पंद्रह अगस्त टूटी बेड़ी भारत-माँ कीमच गया जगत …

आदर्श-होली

नए युग के युवाओं छोड़ दो पुरानी रूढ़िबूढी बातों में विवेक को न भटकाइएनित्य परिवर्तन सिद्धिमूल है प्रकृति कासमय के सुर में मिला के सुर गाइयेनयी पीढ़ी नए हैं …

नव वर्ष न्यारा हो नव वर्ष प्यारा हो

नव वर्ष न्यारा हो ,नव वर्ष प्यारा हो कामना जो भी करोमन में उमंगें जो भरोनव वर्ष में सब पूर्ण होंविघ्न-बाधा मार्ग की, सबपग बढ़ाते चूर्ण होंसफल प्रभु की कृपा सेहर …

दिवाली का पर्व सुहाना आया है

यह पावन दिन चैन-अमन कादुःख-अशांति के नित्य शमन काराम चंद्र के पुनः आगमन कासंदेशा लाया हैदिवाली का पर्व सुहाना आया है आज रोशनी है खंडहर मेंमची धूम धरती-अम्बर मेंसब …

मीठी बोली

बोलो तो मीठा बोलो,तोल-मोल कर,ह्रदय -तुला पर सोच-समझ कर मुहं खोलो बोलो तो मीठा बोलो कौआ किसका धन हरता?पर, उसकी कर्कश कावं-कावं मन निरानंद कर देती है कोयल किसको …

इस जग में तो धन ही बल है

जिससे कूजित कलयुग कल -कल है इस जग में तो धन ही बल हैजीवन-संचारी ये रक्त है इसके बिन हर जीव मृतक है वही स्थिति धन-हीन मनुज की जल …