Author: sunil kumar jaiswal

दीपक

बन सके सूरज न तुम तोदीपक ज़रूर बनना हैयाद ये रखना सदातुमहे आग ही मे जलना हैकर्तव्य है दीपक का जोतुमको वही निभाना हैअस्तित्व अपनी मिटाने न देनातुमको तो …

वो रात

वो रातबिती थी कई रातेंवो करवटें लेते हुएजब दी आवाज़ प्रीत की शहनाईयों नेवो पहली बार मिलनातेरा तन्हाईयों मेशर्मा कर यूँ झुकना तेरी पलकों कायूँ शहमे हुए आना तेराचुपके …

इंसानियत

इंसानियतहर तरफ़ क्यों छल है भराक्यों फरेब है बिखरा हुआकैसी चॉही थी हमने ये दुनियॉजाने ये कैसा बन गयापहले जहॉ बिस्वास थाआज विष का वास हैपहले जो थी मर्यादाआज …

तक़दीर

तक़दीरजिन्दगी हर रोज़ नईसौगात लिए आती हैफिर नई चोट वोबेआवाज लिए आती हैकभी मे चैन से बैठूँऐसा हो नहीं सकतादिले नासाद को हरपलये बेजार किए जाती हैअपनो को ऐसे …

ऑसु

ऑसुअब तो हर दिनऑसुओं मे निकलना हैकभी छुप कर तोकभी हँस कर हमे रोना हैज़ख़्म औरों को दिखाने सेवो नसिहत देंगेदर्द के एहसास कोकोई न समझ पाएगाजिसपे बिती है …

भ्रम

भ्रमजी रहा था अब तकजाने कैसी भ्रम मेपरछाईयो को समझ अपनामे तो बस चलता रहासाथ छूटा जब अंधेरों मेतब मुझको ये एहसास हुआवो भ्रम था उजालों कावो बाजीगरी थी …

सुरबाला

सुरबालाप्रज्वलित से नैन थे वोऔर खुली हुई सिखादेख कर वो मानोलजिज्त हो रही थीस्वर्ग की भी अप्सरासविता कर सिमट रही थीऔर कौमुदी फैली वहॉदेख कर ये दृश्य साराचन्द्र भी …

दीपक

दीपकबन सके सूरज न तुम तोदीपक ज़रूर बनना हैयाद ये रखना सदातुम्हें आग ही में जलना हैकर्तव्य है दीपक का जोतुमको वही निभाना हैअस्तित्व अपनी मिटने न देनातुमको तो …

यादें

यादेंयाद जो मुझको वो थीभूली बिसरी कहानियॉबूँद सी वो यूँ गिरीमिट गई निशानीयॉबुलबुले उठे नहींजल मे वो यूँ मिल गईकोहरे में खोई हुई सीयाद की वो दास्तानघाव वो भरा …

कल्पना

चमन मे चॉदनी फैलीलहर भी दौड़ के आईहजारो ने उसे देखाकली भी मंद मुस्काईकौन थी वो परी थी क्याया कोई अप्सरा थी वो !यही मैं सोचने बैठाक्या मेरी कल्पना …