Author: Sukhbir95

पानी का रंग

पानी के रंग जैसी हैं ये जिंदगी,इसे जैसे बनाओगे वैसे ही बन जाएगी।अगर इरादे मजबूत हो तोआसमान भी छूना मुश्किल नहीं।अगर हम ही कमजोर हो तोये जिंदगी भी हार …

दर्द ए दिल

दर्द ए दिल का क्या हाल बया करू,बस इस दुनिया से छुपाता रहता हूँ।अंदर से जख्म हरे हैं अभी भी,बाहर से यू ही मुस्कुराता रहता हूँ।भूल नहीं पाया अपने …

मिलजुल कर रहा करों यारों

चार दिन की तो ये जिंदगी हैं,क्यों नफ़रत पालते हो यारों।हम पहले इंसान बनना तो सीख लें,क्यों धर्म के नाम पर लड़ते हो यारों।हमारे रास्ते अलग अलग हो सकते …

जो बोएगा सो पाएगा

मत कर इतना गुरूर तूमिट्टी में मिल जाएगा।ऐसा हाल होगा तेराखुद को भी पहचान न पाएगा।ये पैसा और ये ऐशो आरामसब यही रह जाएगा।”सुखबीर” आगे तो सिफारिशें भी नहीं चलेगीजो …

यादें

बीते हुए पलकभी लौट कर नहीं आते।वापस नहीं हो सकतीएक बार जुबान से निकली हुई बाते।नहीं भूली जा सकतीअपनों के साथ हुई मुलाकातें।”सुखबीर” जी ले आज अपनी जिंदगीकल तो …

क्यों लड़ता झगड़ता है तू

क्यों लड़ता झगड़ता है तूक्यों एक दूसरे से बैर रखता है तू।क्यों इंसान होकर इंसान से हीइतनी दुश्मनी पालता है।कभी लड़ाई धर्म के नाम परकभी ज़मीन के टुकड़े चाहता …

वजूद

आंखों की यह पलकें झपका के तो दिखासच बताऊ यह भी ना कर पाएगा।उस परमात्मा के कारण ही तेरा वजूद हैउसके बिना, मिट्टी में मिल जाएगा।यह पैसा, यह शरीर …

ख्वाब

कुछ ख्वाब जिन्दगी मेंहमेशा अधूरे रह जाते हैं।अरे दूसरों को क्या समझाऊ मैं,अपने ही समझ नहीं पाते हैं।अरे हमसे भी तो पूछ कर देखो,हम क्या चाहते हैं।”सुखबीर” जो अपने …

अहंकार

देख रे खुदा यह बन्दाकितना मान करता हैपल पल यह अपने हीअहंकार में मरता हैमेरी वजह से हुआ यह कामऐसे विचार रखता हैक्या तेरी औकाद है रेक्या तू कर …

सपने

सपने देखा करो ओह यारोंसपने साकार भी होते हैं। आज हम जिस मंजिल पर हैंकईओ के ख़्वाब ही होते हैं। बैठे बिठाए नहीं मिलती मंजिलमेहनत करने वाले ही कामयाब …

चाहत

शांति चाहता था मैंपर शांति ढूंढ न पाया।ऐकता चाहता था मैंपर ऐकता रख न पाया।समानता चाहता था मैंपर जात पात को मिटा न पाया।रोज मंदिर भी जाता था मैंपर …

क्या शिकवा करूँ 

जब अपनों ने ही लूट लियाक्या शिकवा करूँ मैं ओरो पर।बाहर से प्यार जताते थेअंदर से नफ़रत जोरों पर।अरे मिल कर बात सुलझा लेतेना आती दरार इन रिश्तों पर।अरे …

क्यों दर दर भटकता है तू

क्यों दर दर भटकता है तूअपनी मांगों के लिएक्यों रोज अड्डे बदलता है तूअपनी चाहतों के लिएक्यों तू उस इंसान के पास जाता हैजो खुद अल्लाह के भिखारी हैअरे …