Author: Shayar Ekaant

हूँ मज़दूर मैं भारत का

घर जाने की कीमत अपनीमैं लाशों से चुकाता हूँहूँ मज़दूर मैं भारत काअपने घर को जाता हूं।दो रोटी की भूख को अपनीमैं गमछे से दबाता हूँबिन चप्पल ओर भूखा …