Author: shalu verma

हमसफ़र

कभी फुर्सत से बैठ मेरे पास ,सुन कभी मेरे दिल का हाल ,बहुत सी अनकही बातें ,कुछ मीठी ,कुछ फीकी सी ,असर है तेरी बातों का ,बाँधे रखता है …

हर रोज़

 हर रोज़ वही धुँआ , हर रोज़ वही नफरत ,इंसानियत को खोज रही मेरे ज़मीन ,अपनों को ही सही राह दिखाने को,घर वापसी की बाट जोहे ,प्रेम और सौहार्द …

अलविदा कलाम साहब

वो आखिरी छन , दृढ़ता विचारो की वही सुगमता , संजिन्दग़ी ,सादगी को आखिरी प्रणाम | साधारणता से महानता का पथ , एक सपना ,अदभुत विचारधारा , आत्मविश्वास क …