Author: shadab

अगर मांग लें तो ज़माना मिल जाए….

दिल-ए-उम्मीद को ठिकाना मिल जाए , तुझसे मिलने का जो बहाना मिल जाए , जब माँगा नहीं तो इतना कुछ पाया , अगर मांग लें तो ज़माना मिल जाए …

तुझे खरीद सकूँ मेरी औकात कहाँ……

ख्व़ाब तो हैं मगर तस्सुरात कहाँ , कुछ कर सकूँ मैं ऐसे हालात कहाँ , तेरी कीमत बहुत है इश्क़-ए-बाज़ार में , तुझे खरीद सकूँ मेरी औकात कहाँ , …

ए तकदीर बता तेरा फैसला क्या है….

हिम्मत क्या है हौसला क्या है , बेघर को क्या पता घोन्सला क्या है , कब तक करुन्गा मै इन्तेजार उसका , ए तकदीर बता तेरा फैसला क्या है …

ग़मों को सबसे छुपाता रहूंगा….

शब् भर दिल जलाता रहूंगा , चराग ये सारे बुझाता रहूंगा , लिखता रहूंगा मिटाता रहूंगा , साहिल पे घर बनाता रहूंगा , ज़र्फ अपना आज़माता रहूंगा , ग़मों …

बिछड़ने का तुझको इमकान क्यूँ है….

इतने करीब तो हूँ फिर हैरान क्यूँ है , क्यूँ सोचता है ईतना परेशान क्यूँ है , हमें जुदा नहीं कर सकता कोई अब , बिछड़ने का तुझको इमकान …

नींद में भी आहट महसूस हुई….

कोई शज़र सायादार नहीं देखा , फजाओं में आबशार नहीं देखा , बाद-ए-तौबा भी सरजद हुआ , खुद जैसा गुनाहगार नहीं देखा , नींद में भी आहट महसूस हुई …