Author: Sandhya Golchha

माँ का प्रेम

हवा की सरसराहट, ऐसा लगता हैकोई धुन गुनगुनाती हुई माँहौले से पुकार रही है मुझेछलक जाती है आज भी आँखेंउस प्यार के एहसास सेजो कराया था माँ ने मुझेए …

शांति

मन है समुन्दर,भावनाएं लहरें, लहरों का मचलना,कोई दस्तक-सी दे गया हो शांत समुन्दर में ज्यूँ.. कोमल छुअन गुलाब-पंखुड़ियों की, हो जाती है कसक,एक काँटा हवा में लहराकर टकरा गया …

रिश्ते

रिश्तों की गर्मी,रिश्तों की नर्मी, कुछ जलता,कुछ पिघलता, कुछ कसकता,कुछ रिसता, रिश्ते जुड़ते हैं,रिश्ते बिगड़ते हैं| गुनाहगार बनाता है एक इन्सान दुसरे इन्सान को, परिस्थितियाँ सहयोगी हैं उसके इस …

डाह

देख लिया पिय-तन पर,ज्यूँ पर-नारी-केश डाह जरी भौंहन हँसी,क्यूँ न होय जिय-क्लेश पिया रैन बिताई सौतन संग,प्रिया-प्रेम बिसराय ऐसो दर्द जगायो हिय में,डाह सों जिय जर जाय सोचत देख …

आओ हम-तुम प्यार करें

स्निग्ध-स्वच्छ-नील-श्याम-धवल, सूर्य-प्रकाश में सागर-प्रवाह-अविरल, मानो झिलमिल इन्द्रधनुषी आँचल| ऊष्म-कणों से सिक्त वादियाँ, यूं है लगता ओस-कण-सिक्त| लजवन्ती नारी तन जैसे, अकुलाया-सा श्वेत-बिंदु-सिक्त| आसमां तड़प रहा जमीं मिलन को, मध्य …

उलझन

ये कैसी उलझन है, उलझन है या बंधन है? कितना मुश्किल और आसान है, प्रकट होना मन की भावनाओं का| ये ख़ुशी,ये गम,ये प्यार,ये उपेक्षा, मिलकर स्थिति कितनी गरीब …