Author: Rakesh Pandey

जद्दोजहद या सुकून..

जद्-अो-जहद में उलझ-मैनें सुकून से वैर ले लिया,लगता था कि मेरी गलतियाँ-हो जाएंगी दरकिनार – खूबियों से, वहम छट गया वक्त ने जब-रूबरू करा दिया परख से,अब सुकून चुनूँ …

फिर चल पड़ा हूँ मैं..

फिर चल पड़ा हूँ मैं उस तरफकहते हैं लोग जिधर बाधाएं बहुत हैं,अब उनको कहाँ मालुम किबाधाएं पार पाना मेरी फ़ितरत में हैऔर हार न मानना मेरी आदत |फिर …

यूँ ही नहीं स्वप्न देखता हूँ मैं..

यूँ ही नहीं स्वप्न देखता हूँ मैं, सच कहूँ तो ये आइना हैं-उन तानों बानों का जिनकाजुड़ाव है मेरे जज्बातों से,इरादों से और उन्मादों से |सराबोर हूँ मैं कुछ …