Author: rk pant

भक्ति कविता

बृन्दाबन औ मथुरा काशी गया प्रयाग हरिद्वार सभी तीरथ की महिमा न्यारी नमन मेरा बारबार पशुपतिनाथ गोसाईं निर्मल मन का भाव मझधार में उलझे जिनकी होती नय्याँ पार ये …

कुछ शेर

१- अजीब उस मन्जर के बीच कारवाँ चलता गया होती गयी राह आसान मैं भी कुछ बदलता गया २- कम्बख्त  तकदीर की भी कुछ मजबूरियाँ रही होंगी बरना तो …

हाइकु

१- देश आजाद हो रही सियासत क्युँ बरबाद २- मैल  मन का भला नहीं करेगा मेरे वतन का ३- देश-भक्त हुँ लड्ने को तैयार हुँ सिपाही भी हुँ  

भगवान

भक्तों की भक्ति में बडा आनन्द आता है किशना मथुरा बृन्दाबन यहीं आनन्द आता है किशना कुछ बिनती मेरी भी सुनना फरियादें रही हैं मेरी तेरा हात सर पे …