Author: ऋषि के.सी.

चल-चले मिले कहीं

चल-चले मिले कहीं न तेरा आश्रय न मेरा,प्रीति-गीत गाए कहीं चल-चले मिले कहीं।सच-झूठ की फिकर नहीजिस राहा पर मिला,मैं अजनबी नही,चल-चले मिले कहीं।।तेरे सपने मेरे अपनेयादों के संग चले,आ …

वक़्त

​ठहरजाता है वक़्त,थम जाता है वक़्त, वक़्त की मिज़ाज़ क्या? हार जाते है सब। ज़रा देखो, जरा सोचो! निर्जिव जो,भागे तेज़जरा सोचो, जरा देखो!खुली किताब, पढी पेज।यह ज़िंदगी की …

एहसाास वर्षा का

पेड़ -पौधें लहराते हवाओं में, बिजली चमकती बादालो में, मैं भी घिर गया तूफ़ानो मे, कट रहे थे पल मुश्किलों में।कोई पूछे हाल हमारा यही आश लगा हम बैठे …

अलविदा-ऋषि के.सी

अधूरा हूँ मैं,अधूरी है जवानी,जिन्दा हूँ मैं,कम है जिंदगानी अभी क़त्ल हुआ,बनी एक नई कहानी सुबह की किरण,रातों का तारा जरा नयन में आंसू लिए,मुस्कुरा रहा है दोस्त हमारा …

यादों की मुलाक़ात-ऋषि के.सी.

गुन-गुना रहा हूँ,तेरे लिए,जाने खुदा!कहो तुम!दिल भी कितना रोता है,क्यों ?अब तेरी बेखुदी जो यूँ,तनया जियेंगे मरना है जो,किस्मत में कहा मिली है तू,किससे पूछा करेंगे ख़ुशी अपनी,तेरी यादें …

राजा राम मोहन राय- ऋषि के.सी.

नानी आज कोई कहानी सुनाओ,जिसमे में राजा आए,और नाहि रानी की बीती बताओं,नानी जरा मुस्कुराकर कह दो,गाथा वीर भरी |एक नारी समाज के रूढ़ि से डरी,देख आए जब प्यारे …

फरियाद-ऋषि के.सी.

चम चमाती चांदनी रात, चारों ओर से आयी है, खिल-खिलाकार हंसी तुम्हारी, ना जाने किससे बनकर आयी है।थककर सायं सो जाता है, कौन उसके हृदय की व्यथा को जानता …

ख़्वाइश-ऋषि के.सी.

कर्जदार हूँ तेरी दुकान काचलना हैं कुछ कमाने मकान का न शरीर में वस्त्र का सहयोग ना खाने को निवालाकैसी दशा हैं अब तू बता उपरवाला।तेरी नौकरी मे हैं …

“कविता  नहीं  आवाज  हूँ,मैं एक नई कहानी,सुनाता  हूँ,मैं”-ऋषि के.सी.

एक नई कहानी ,सुनाता हूँ मैं,एक नई कहानी,सुनाता हूँ मैं,रहता वो डूबते सागर में ,एक नई………………..मैं ।चिड़िया-सी कहानी है उसकी ,उड़ता वो-फिरता जीवन की ,तालाश में,एक नई……………….मैं।अपने भी थे …