Author: RAVINDRA KUMAR RAMAN

खिड़की खुली

अर्ज किया हैं खिड़की खुली जुल्फें गिरी सामने हुस्न का दिदार था वाह वाह………… फ़िर क्या ? फ़िर क्या जुल्फें हटी किस्मत फूटती वो नहाया हुवा सरदार सरदार था …