Author: Ravi Vaid

हर शाम

हर शाम, लिए दो प्याले जाम, एक तेरे नाम, एक मेरे नाम, याद आती है, कुछ मुलाकातें, और कुछ साथ गुज़ारी शाम………. चले थे जिन रस्तो पर, लिए हाथों …

सावन मैं नयनन से….

सावन मैं नयनन से, जो बह निकले नीर, कह देना बरखा है, छुपा लेना पीर…… दर्द परया क्यों समझेगा कोई, भई दुनिया जबसे निमोही, प्रीत पर तुम्हरी उपहास करेगी, …

कविता रोज़ मैं करता हूँ

जाग प्रतिदिन रात्रि को, विचार जीवन के अनुभवों से, बाँटने मित्रों, परिजनों से, दे मात निद्रा व स्वप्नों को, कविता रोज़ मैं करता हूँ , कविता रोज़ मैं करता …