Author: RAVI SRIVASTAVA

कौन सही, कौन गलत?

जानता हूँ कि तुम मुझसे हूँ यूं खफ़ाजाते जाते मैंने तुमसे कुछ न कहा।अश्क आंखों में अपने संभाले रहेंंहाल था तो बुरा तुमसे कैसे कहें।जख़्म कांटों से जैसे, कुरेदा …

हां मैं नारी हूँ

हांं मैं नारी हूँकभी मां, कभी बहन,कभी बेटी तो कभी पत्नीअपने हर धर्म को निभाती हूँ।इस निर्लज संसार मेंअबला नारी कहलाती हूँलेकिन अब मैं अबला नहीं हूँ,मजबूती से साथ …

कभी ग़म तो कभी खुशी

हार रहा हूँ मैंकवि लगातार विपल होने पर उदास होकर कहता हैहार रहा हूँ मैंटूट रहा हूँ मैंपिघल रहा हूँ मैंजाने कितने दिलों सेनिकल रहा हूँ मैं।हर बार है …

तुम परी तो नहीं !

कहीं तुम परी तो नहींसुंदर रूप, नयन छोटे सेचेहरे पर लाली है छायी,जुल्फों का यूं, हवा में उड़नाजैसे काली घटा है आई।ओठों पर मुस्कान है ऐसे जैसे फैली हो …

तुझमें मेरी दुनिया

थोड़ा सा विचलित हूँ मैं, थोड़ा सा उदास हूँ।दूर भले मैं तुझसे रहूँ, लेकिन दिल के पास हूँ।याद तेरी जब जब आती है, दिल मेरा बस रोता है।खड़ा रहूँ …

मैं लोकतंत्र हूँ

मैं लोकतंत्र हूँ।निश्छल, मजबूत और सूझबूझ का सागर हूँ।सारा ज्ञान मेरे अंदर है विराजमान है,फिर भी न जाने प्राणी क्यों अज्ञान है?हमेशा की तरह फिर से मुझे संकट में …

सुन प्रिये

सुन प्रिये तूने, क्यों ऐसा किया, क्यों प्यार हमारा, भुला दिया।हर बार ,भरोसा दे देकर, हर बार ,भरोसा तोड़ा हैदिल मेरा ऐसे, तड़प रहा,जैसे तेल में, तल रहा पकौड़ा …

अधूरे सपने

तेरी आँखों में कहीं, खो गए हैंजागती आँखों में, सो गए हैं।देखकर तुझको मुझे, कुछ ऐसा लगा।बात दिल की तुझसे, मैं कह न सका।आसमां से जैसे ,कोई उतरी हो …

आख़िर खुदकुशी करते हैं क्यों ?

आख़िर खुदकुशी करते हैं क्यों ? जिंदगी जीने से डरते हैं क्यों ? फंदे पर लटककर झूले जीवन है अनमोल ये भूले। अपनों को देकर तो आंसू, छोड़ दिए …

उनकी तमन्ना

उन्होने तमन्नाओं को पूरा कर लिया, मुझे नही है उनसे कोई भी शिकवा। किसी के वादों से बधां मजबूर हूं, उन्हें लगता है शायद कमजोर हूं। बड़ो का आदर, …

आसूओं की आवाज़

क्या कसूर था मेरा, गोलियों से भून दिया, शिक्षा के मंदिर में बेगुनाहों का खून किया। सजाकर भेजा था, लाडले को अपने टूट गए उनके, जो देखे थे सपने। …