Author: Raushan Pathak

मै जिन्दा भी नही

मै जिन्दा भी नही बहुत दूर तक मै देखता ही नही हू , और पास कुछ नजर आत भी नही । रह रह के वहम हो उठता है, कही चारो तरफ अ`धेरा तो नही ॥   उनको सोचना छोड दिया आजकल, और गैरो को याद करके फायदा भी कया ? रह-रह के लेकिन ये खयाल हो उठता है, उनका छोड के जाना, बुरा सपना तो नही॥   दस्त्खो पै आजकल मै ध्यान देता नही, कइ बार दौडा दरवाजे, कोइ रहता ही नही । शायद रह-रह के कान बज उठते है मेरे, ये सोच दौडता हु, कही कोइ अपना तो नही ॥ अलग-अलग ही रहता …

दिल और जला ले मेरा

दिल और जला ले मेरा क्या दिल नही भरा तेरा मुझे प्यार के आंसू रूला के, कि जला रही हो दिल मेरा, मेरी बेवशी पै मुस्कुरा के । दिल और जला ले मेरा किसी और से मोह्ब्ब्त करके । मेरे दिल पै ठोकर मारी, और के दिल को जहा बनाया । अब दिल मे आग लगाती हो, ख्वाबो मेरे आ – आ के ॥ दिल और जल ले मेरा………. मेरा हाथ ना थामा तुने, चली गई तू मुझसे मुकङ के । अब मुस्काती हो देख मुझे, किसी और का हाथ पकङके ॥ दिल और जल ले मेरा………. मेरी राहे सुनी करके, और के राह को मुकाम बनाया । क्या मिलता अब ईठला कर, रस्ते से मेरे गुजरके ॥ …

जाने कितनी बार

 जाने कितनी बार बिका मै रूपये के बाजार मे, और जितनी बार बिका, हर बिका उधार मे । कितनो के मतलब के खातिर,  मेरी आरजू निलाम हुई । मैने पाया कुछ नही, इस मतलबी संसार मे ॥