Author: rashmidelhi

किस किताब के शब्द हो तुम।

किस किताब के शब्द हो तुम जो इतने दिनों से समझी नहीं जितना खोऊं उतना उलझुं ठिकाने की कोई कमती नहीं आंखों से देखा बेहद सरल समझने बैठी थी …

बेटी लेकर क्या करोगे

बेटी लेकर तुम करोगे क्या जन्म देकर करोगे क्या रौब तो रहेगा बेटे का ही कुल को तुम्हारे समेटगा ही बचपन से झुकना उसे सिखाओगे क्या पुरुष प्रधान दिखाओगे …

कौने खेतवा मां अनजवा उगहिहो

जब तुम अयिहो तब का खाइहो कौने खेतवा मां अनजवा उगहिहो सब तो बनाए डारेऊ पक्की जमीनिया नाय राखेओ कौनो कच्ची मिनिया अभहीन के तुम फायदा देखेओ जमींवा से …

मोबाइल से नजरें हटाया करोगे।

मोहल्ले में जब तुम आया करोगे किसी नुक्कड़ पर दोपहरी बिताया करोगे नजरों से नजरें जब मिलाया करोगे नए फैशन के दौर भी को आजमाया करोगे चार लडको के …

बोलती मूरत का करिश्मा दिखाएंगे ।

हज़ारो बातें दफना कर आज पर जिन्दगी की चादर पहना कर चलो काटते हैं वो सफ़र तैखने मे रखेंगे तेरी भी ख़बर बोलती मूरत का करिश्मा हम दिखाएंगे दुनियां …

पंहुचा घर का।

दिल्ली से चले हम गांव अपन घर अपने पांव। जब देखेन हम नोएडा चलत गाएन रोड़ा आय रोड़ा अमेठी राहेंय बहुताए मीठी, लाग गाए झोरा मां बहुताये चींटी पेड़ा …