Author: rashmidelhi

नारी भेद।

नारी भेद चेत रहा था मुझमें क्या फर्क है जो पुरुषार्थ नहीं तुझमें नयनों से न नीर बहावे दया प्रेम त्याग दिखावे क्या जिवन तेरा है मुझमें नारी भेद …

क्या पानी पी कर जी पाएंगी।

न कुछ कहो अब आंखें समुंदर बन जाएंगी डूबना आखिर तुम्हे नही है पानी क्या पी कर जी पाएंगी। तुम बिखरोगे सब कहीं चांदनी रातों क्या सताएंगी खूब करते …

किसी की जुल्फों ने मुस्कुराना छोड़ दिया।

जुल्फों ने मुस्कुराना छोड़ दिया किसी राह ने नाता तोड दिया खूब चली चाले कभी सैनिक मरे कभी राजा ने जीना छोड़ दिया बस सिरे पर जिंदगानी थी इतना …

मै तुझमें हुं पर तू मुझमे नहीं।

मै तुझमें हूं पर तुम मुझमे नहीं तुम जहां कहीं में भी वहीं मेरा तुझसे आगे कोई मोड़ नहीं मेरा ओर कोई जोड़ नहीं तेरा मिलना क्यों नहीं है …

अंसुओ से भीजी थी कमीज़ फिर भी मुस्कुरा कर चल दिए।

आंसुओ से भिजी थी कमीज फिर भी मुस्कुराकर चल दिए कर्ज में डूबे थे बेदम फिर भी फर्ज निभाने चल दिए ये कोई धूल नहीं वत्नफरोशी मिट्टी है घर …

अयोध्या की अवधि ।

अयोध्या की अवधी कहां गई न अंग्रेजीय मा रही न कौने ने हिंदीये मा कही। बच्चक बच्चा अब तो अंग्रेजी बोलाये नाप ऊ तराजू पर नाही मोबाइलाए मा तौले। …

वो आईना लेके मुस्कुराते रहे।

वो लेके आइना मुस्कुराते रहें हवाओं में थे एहसास सो आते जाते रहें आईने से ही न जाने क्यों इतना शरमाते रहें हर राज दिखा कर भी छिपाते रहें …