Author: rakesh kumar

गुरू

कैसे करूं गुणगान तेरा हे गुरू तू है भगवान मेरा तुमने रोपा वो भ्रूण उर में भाग्य फलित उनवान मेरा मैं ऋणी रहूँगा सदा तेरा बीता बचपन उत्तम मेरा …

1 बेशक कितना भी सफल हो जाऊँगा लेकिन मैं भी एक दिन कल हो जाऊँगा फिर समा जाऐगा सबकुछ शुन्य में चाहे कितना भी अव्वल हो जाऊँगा 2 कसम …

नदी

विषय -नदीदिनांक- 15/06/2020 कल-कल करती अविरल धारा लेकर मनमौजी अनुराग सारा एक दिशा में ही रहती है एक नदी मेरे गाँव में बहती है हर लेती है तृष्णा की …

मन

विषय-मन विधा लघु लेख मन एक विशाल सागर की तरह होता है जिसमें जाने कितनी लहरें पल प्रतिपल हिलोरें मारती हैं। लेकिन अगर इसकी स्थिति शांत नहीं हो तो …

गजल

4 जून 2020विधा गजलकाफिया आ स्वर रदीफ़ ही नहीं बहुत नादान है ये दिल किसी की मानता ही नहीं कौन है दुश्मनों में शामिल ये पहचानता ही नहीं पालता …

कर्मों का हिसाब है

मंच को सादर नमन विधा- घनाक्षरी छंदये मनुज पशुता का,भीष्ण चरम काल है प्रकृति की गोद सूखी , ये बड़ा सवाल है छोटे छोटे जीव जंतु, जिन्दा पकाती आग …

मानवता

मंच को सादर नमन विषय :- मानवता विधा :- लघुकथादिनांक :- 09/06/2020दिवस :- मंगलवारबहुत समय पहले की बात है जब एक जवान जम्मू कश्मीर में स्थानान्तरित हुआ। इसी दौरान …

छन्द

तिथि– 09-06-2020दिवस– मंगलवारविषय– ग्रहणविधा– छन्दमेरे मन के कटु सागर से सब ग्रहण विकार मिटा दो तुम हे पिताम्बर जग में फिर से वो प्रेम अवतार दिखा दो तुम मेरे …

आत्मनिर्भर भारत

दिनांक-4/6/2020, गुरुवारविषय- आत्मनिर्भर भारतआत्मनिर्भर भारत शब्द का अर्थ बहुत व्यापक है। आज हम अगर बात करें समय की तो आजादी के पहले से ही हम स्वदेशी-स्वदेशी चिल्ला रहे हैं …

वो जानता ही नहीं

विधा गजलदोहा गजलकाफिया आ स्वर रदीफ़ ही नहीं बहुत नादान है ये दिल किसी की मानता ही नहीं कौन है दुश्मनों में शामिल ये पहचानता ही नहीं पालता रहा …

गीत

नमन मंचदिनांक.. 28/05/2020बिषय.. गीत मुखड़ा हमने भी कभी एक समंदर गोते खाते देखा था एक रूदाली के सपनो में हंशते गाते देखा था अंतरा 1बड़ा विकट सा बहुत सघन …

अफवाह

नमन मंचदिनांक 27/05/20दिन बुधवारविधा गीत विषय : अफवाह मुखड़ाये अफवाह रही अभी तक तेरे शहर की गलियों में मैं तुझे भूल गया हूँ साथी शहर की रंगरलियों में अंतरा …

अम्फान

मंच को सादर नमन विषय अम्फान पहले करोना अब अम्फानखड़ा देखे बेबस इंसान किसलिए ये वज्रपातकिसकी गलती का है संज्ञान अर्थ खोता चक्रव्यूह है सर्वज्ञ गुनेहगार तू है कर …

भाईचारा

नमन साहित्य परिवारदिनाँक: 25.05.2020विषय भाईचारा समता की आसान सड़क हो होंठों पर सहयोग का नारा आज समय की मांग यही है आपस में हो भाईचारा मेहनत सींचे खलिहान हमारे …

बदलता मौसम

नमन मंच दिनांक :- 23/05/20 विषय :मौसम का बदला रुख ********************मौसम बदला,बदली फिजा जहर घुली,ताजी हवा मृत रेत सी है घटाऐंमृगछाल सी हुई लताअर्ध पका है फलों का राजा …