Author: rakesh kumar

डायरी

1 जितनी भी गुजरी बेमिसाल गुजरी तेरी पनाह में हर चीज बड़ी है मुस्कराते हुऐ पलटे मुक्कदर के पन्ने हमने ज़िन्दगी तेरी आँखों से पढी है 2 जिसपे दूजा …

बेटियाँ सुरक्षित कैसे हों?

बेटियाँ सुरक्षित कैसे हों? विधा: परिचर्चा ये बात बहुत खेद की है भारत जैसे महान देश में जिसने पूरे विश्व को चरित्र का पाठ पढाया,बलात्कार जैसे पाप कृत्य होते …

दोहे

प्रेम भाव एवं भावना, बहते जैसे मेघ जो पहचाने हृदय को ,वो जाने सब भेद प्रेम उत्तम विशाल है, कैसे जाने ठोर सिर्फ लालसा की गढरी ,बांधे फिरते ढोर …

गुरू

कैसे करूं गुणगान तेरा हे गुरू तू है भगवान मेरा तुमने रोपा वो भ्रूण उर में भाग्य फलित उनवान मेरा मैं ऋणी रहूँगा सदा तेरा बीता बचपन उत्तम मेरा …

1 बेशक कितना भी सफल हो जाऊँगा लेकिन मैं भी एक दिन कल हो जाऊँगा फिर समा जाऐगा सबकुछ शुन्य में चाहे कितना भी अव्वल हो जाऊँगा 2 कसम …

नदी

विषय -नदीदिनांक- 15/06/2020 कल-कल करती अविरल धारा लेकर मनमौजी अनुराग सारा एक दिशा में ही रहती है एक नदी मेरे गाँव में बहती है हर लेती है तृष्णा की …

मन

विषय-मन विधा लघु लेख मन एक विशाल सागर की तरह होता है जिसमें जाने कितनी लहरें पल प्रतिपल हिलोरें मारती हैं। लेकिन अगर इसकी स्थिति शांत नहीं हो तो …

गजल

4 जून 2020विधा गजलकाफिया आ स्वर रदीफ़ ही नहीं बहुत नादान है ये दिल किसी की मानता ही नहीं कौन है दुश्मनों में शामिल ये पहचानता ही नहीं पालता …

कर्मों का हिसाब है

मंच को सादर नमन विधा- घनाक्षरी छंदये मनुज पशुता का,भीष्ण चरम काल है प्रकृति की गोद सूखी , ये बड़ा सवाल है छोटे छोटे जीव जंतु, जिन्दा पकाती आग …

मानवता

मंच को सादर नमन विषय :- मानवता विधा :- लघुकथादिनांक :- 09/06/2020दिवस :- मंगलवारबहुत समय पहले की बात है जब एक जवान जम्मू कश्मीर में स्थानान्तरित हुआ। इसी दौरान …

छन्द

तिथि– 09-06-2020दिवस– मंगलवारविषय– ग्रहणविधा– छन्दमेरे मन के कटु सागर से सब ग्रहण विकार मिटा दो तुम हे पिताम्बर जग में फिर से वो प्रेम अवतार दिखा दो तुम मेरे …

आत्मनिर्भर भारत

दिनांक-4/6/2020, गुरुवारविषय- आत्मनिर्भर भारतआत्मनिर्भर भारत शब्द का अर्थ बहुत व्यापक है। आज हम अगर बात करें समय की तो आजादी के पहले से ही हम स्वदेशी-स्वदेशी चिल्ला रहे हैं …

वो जानता ही नहीं

विधा गजलदोहा गजलकाफिया आ स्वर रदीफ़ ही नहीं बहुत नादान है ये दिल किसी की मानता ही नहीं कौन है दुश्मनों में शामिल ये पहचानता ही नहीं पालता रहा …

गीत

नमन मंचदिनांक.. 28/05/2020बिषय.. गीत मुखड़ा हमने भी कभी एक समंदर गोते खाते देखा था एक रूदाली के सपनो में हंशते गाते देखा था अंतरा 1बड़ा विकट सा बहुत सघन …

अफवाह

नमन मंचदिनांक 27/05/20दिन बुधवारविधा गीत विषय : अफवाह मुखड़ाये अफवाह रही अभी तक तेरे शहर की गलियों में मैं तुझे भूल गया हूँ साथी शहर की रंगरलियों में अंतरा …