Author: rakesh kumar

प्रभु राम

परमआज्ञाकारी दशरथ नंदन अति पावन है जिसका वंदन जो बसता है घाट घाट में हर नाड़ी में हर ललाट में नीतिनिधान सबका पालक प्रेमनिधि प्रभु जैसे बालक सूत ना …

डायरी

1 जितनी भी गुजरी बेमिसाल गुजरी तेरी पनाह में हर चीज बड़ी है मुस्कराते हुऐ पलटे मुक्कदर के पन्ने हमने ज़िन्दगी तेरी आँखों से पढी है 2 जिसपे दूजा …

बेटियाँ सुरक्षित कैसे हों?

बेटियाँ सुरक्षित कैसे हों? विधा: परिचर्चा ये बात बहुत खेद की है भारत जैसे महान देश में जिसने पूरे विश्व को चरित्र का पाठ पढाया,बलात्कार जैसे पाप कृत्य होते …

दोहे

प्रेम भाव एवं भावना, बहते जैसे मेघ जो पहचाने हृदय को ,वो जाने सब भेद प्रेम उत्तम विशाल है, कैसे जाने ठोर सिर्फ लालसा की गढरी ,बांधे फिरते ढोर …

गुरू

कैसे करूं गुणगान तेरा हे गुरू तू है भगवान मेरा तुमने रोपा वो भ्रूण उर में भाग्य फलित उनवान मेरा मैं ऋणी रहूँगा सदा तेरा बीता बचपन उत्तम मेरा …

नदी

विषय -नदीदिनांक- 15/06/2020 कल-कल करती अविरल धारा लेकर मनमौजी अनुराग सारा एक दिशा में ही रहती है एक नदी मेरे गाँव में बहती है हर लेती है तृष्णा की …

मन

विषय-मन विधा लघु लेख मन एक विशाल सागर की तरह होता है जिसमें जाने कितनी लहरें पल प्रतिपल हिलोरें मारती हैं। लेकिन अगर इसकी स्थिति शांत नहीं हो तो …

गजल

4 जून 2020विधा गजलकाफिया आ स्वर रदीफ़ ही नहीं बहुत नादान है ये दिल किसी की मानता ही नहीं कौन है दुश्मनों में शामिल ये पहचानता ही नहीं पालता …

कर्मों का हिसाब है

मंच को सादर नमन विधा- घनाक्षरी छंदये मनुज पशुता का,भीष्ण चरम काल है प्रकृति की गोद सूखी , ये बड़ा सवाल है छोटे छोटे जीव जंतु, जिन्दा पकाती आग …

मानवता

मंच को सादर नमन विषय :- मानवता विधा :- लघुकथादिनांक :- 09/06/2020दिवस :- मंगलवारबहुत समय पहले की बात है जब एक जवान जम्मू कश्मीर में स्थानान्तरित हुआ। इसी दौरान …

छन्द

तिथि– 09-06-2020दिवस– मंगलवारविषय– ग्रहणविधा– छन्दमेरे मन के कटु सागर से सब ग्रहण विकार मिटा दो तुम हे पिताम्बर जग में फिर से वो प्रेम अवतार दिखा दो तुम मेरे …

आत्मनिर्भर भारत

दिनांक-4/6/2020, गुरुवारविषय- आत्मनिर्भर भारतआत्मनिर्भर भारत शब्द का अर्थ बहुत व्यापक है। आज हम अगर बात करें समय की तो आजादी के पहले से ही हम स्वदेशी-स्वदेशी चिल्ला रहे हैं …

वो जानता ही नहीं

विधा गजलदोहा गजलकाफिया आ स्वर रदीफ़ ही नहीं बहुत नादान है ये दिल किसी की मानता ही नहीं कौन है दुश्मनों में शामिल ये पहचानता ही नहीं पालता रहा …

अफवाह

नमन मंचदिनांक 27/05/20दिन बुधवारविधा गीत विषय : अफवाह मुखड़ाये अफवाह रही अभी तक तेरे शहर की गलियों में मैं तुझे भूल गया हूँ साथी शहर की रंगरलियों में अंतरा …