Author: Rajesh Kumar Verma

भजन

ओ माझी जीवन दिया तुझे सौप मायजाल में खुब फंसाया ,कभी हंसाया कभी रूलाया रिश्ते नातों में बंधी है काया ,तू बंधन दे अब खोल ओ माझी जीवन……………. ठौर …

यहाँ रोने से क्या होगा

यहाँ रोने से क्या होगा मिलेंगें लोग बहुत तुमको चाहने वाले मिलेंगें कम ही मगर तुमको निभाने वाले ना जाने कैसी रिवायतें हैं कैसा है चलन देख हालात मिलाते …

भजन

ओ माझी जीवन दिया तुझे सौप मायजाल में खुब फंसाया ,कभी हंसाया कभी रूलाया रिश्ते नातों में बंधी है काया ,तू बंधन दे अब खोल ओ माझी जीवन……………. ठौर …

भजन

(तर्ज: आजा आजा रे……) भव से बेडा पार लगेगा राधे राधे कृष्ण कृष्ण जो भी कहेगा मन बांवरा है करता है अपनी विषयों की प्यास यहां कभी नहीं बुझती …