Author: पंडित राजन कुमार मिश्र

शायरी संग्रह प्रथम खंड —पं.राजन कुमार मिश्र।

(क) बगीचे में खिली गुलाब की फूल हो तुम, बसंत में चली सुहानी हवा की बयार हो तुम। रजनी में चांद सी मेहमान हो तुम, मोहब्बत में इस हमसफर …

जन-आक्रोश —-पं.राजन कुमार मिश्र।

नहीं जरूरत इन अपनो की, जिनमें लोगों का ख्याल न हो। नहीं जरूरत इस जीवन की, जिनमें अपनों का एहसास न हो। नहीं जरूरत इन सुबहें की, जिनमें उजालों …

अतीत के गुलाम —पं.राजन कुमार मिश्र।

कल तुम थे,आज हम है। ये चक्र है,कुचक्र नहीं। यहां देर है,अंधेर नहीं। कल तुम थे,आज हम है। कल अतीत था,आज वर्तमान है। यह लोकतंत्र है,राजतंत्र नहीं। राजा भी …

निर्धन की अंतरात्मा–पं.राजन कुमार मिश्र।

मैं रोया, फिर हँसा। जो अजीब सी दुनिया में फँसा। माएँ सोती है भूखे पेट, बच्चे सोते है रो के भर पेट। क्या विरासत में मिली है इन्हें ये …