Author: pradip GHOSE ROY

शिक्षा से बदलता जमाना

सबके मूल मे है शिक्षा,जो बदल देती मानव प्रक्रिति आज की शिक्षण पधति हमे ऐसा धकेला कि बडे बुजुरग हो गये अकेला फैसन बद्ला,सोच बद्ला, रिस्ते ट्टे,बिख्ररे परिवार कोइ …

पर्यावरण के दुश्मन हम

घोर चिन्ता मे आज मानव मन देख बदलते पर्यवरण; प्रक्रिति ने जताई आपत्ति देकर पर्यावरण मे विपति; मानव न सोचा न जाना प्रक्रति को ललकारा काट दिये सारे जगल …

मानव अहन्कार किस बात पर

मानव जाति को है आज किस बात पर अहन्कार! किस प्रगति पर गर्व किया ! क्योकि हमने दूर ग्रहो मे यात्रा किया या फिर अन्तरीक्श मे आधिपत्य जमाया अणु …