Author: पूनम श्रीवास्तव

निराला-बचपन

बचपन तो होता है निराला निश्छल, निर्मल,मस्ती वाला दुनिया से उसको क्या मतलब वो तो खुद ही भोला- भाला । मां की गोदी में लोरी सुन कर वह तो …

माँ तेरी याद में……।

           माँ तेरी कोख से जनम लिया             इससे बड़ा कोई वरदान नहीं             तेरे दिल से निकले आशीर्वचन             मुझसे बड़ा धनवान नही             …

मां

मां सिर्फ़ शब्द नहीं पूरी दुनिया पूरा संसार है मां अंतरिक्ष के इस पार से उस पार तक का अंतहीन विस्तार है मां। मां सिर्फ़ शब्द नहीं——————–। शिशु की …

खतरा अस्तित्व का

एक बादल का टुकड़ा खरगोश के छौने जैसा फ़ुदक रहा है इन काले पहाड़ों के ऊपर बरसने को आतुर्। पर सहम जाता है बार बार पहाड़ों की कठोरता और …

भयाक्रान्त

उसकी आंखों की पुतलियों में अब नहीं होती कोई हलचल सतरंगे गुब्बारों और लाल पन्नी वाले चश्मों को देखकर। नहीं फ़ड़कते हैं अब उसके होंठ बांसुरी बजाने के लिये …

ओ मां

जब भी मैं बैठता हूं ढलते सूरज के साथ बालकनी में कुर्सी पर अकेला मेरी आंखों के सामने आता है कैमरे का व्यूफ़ाइंडर और उसमें झलकती है एक तस्वीर …

निराला-बचपन

बचपन तो होता है निराला निश्छल, निर्मल,मस्ती वाला दुनिया से उसको क्या मतलब वो तो खुद ही भोला- भाला । मां की गोदी में लोरी सुन कर वह तो …

एक लोरी

एक लोरी  लाडली ओ लाडली सो जा मेरी लाडली देर न कर निंदिया रानी सोने चली मेरी लाडली। लाडली…………………। मां पापा की लाडली बहना की तू सखी भली भइया …