Author: पियुष राज

कट गया चालान…(हास्य व्यंग्य)

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होली से पहले पापा क्यों घर आए है…? (पीयूष राज ‘पारस’)

*पुलवामा हमले के बाद लिखी मेरी नई कविता*_”एक सात साल का बच्चा अपनी माँ से पूछता है जब उसके पापा होली से पहले तिरंगे में लिपटकर घर आते है …

हां, हम झारखंडी है….(कवि पियुष राज ‘पारस’)

_”वैसे तो हम सब हिंदुस्तानी है ,पर ये कविता इसलिए लिखा हूँ क्योंकि जब झारखंड के लोग दूसरे राज्य जाते है तो वहां उनका वेश-भूसा ओर बोली का लोग …

आग (पियुष राज ‘पारस’)

मेरी नयी कविता कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर ,आपको कैसा लगा जरूर बताएं ,आपकी प्रतिक्रिया के आशा करता हूं 🙏🏻🙏🏻आगज्ञान का कोई मोल नहींयहाँ सुर समाया है काग मेंप्रतिभा झुलस …

हम अपनी कलम से हिंदुस्तान लिखते है …. (पीयूष राज)

मुक्तकहम ना हिन्दू ना मुसलमान लिखते हैहम ना गीता ना कुरान लिखते हैदिल की जज्बातो को शब्दों में पिरोकरहम अपनी कलम से हिंदुस्तान लिखते है✍🏻© पियुष राजदुमका झारखंड Оформить и …

अभी पूरा आसमान बाकी है …

अभी पूरा आसमान बाकी हैअसफलताओ से डरो नहीनिराश मन को करो नहीबस करते जाओ मेहनतक्योकि तेरी पहचान बाकी हैहौसले की उड़ान मत कर कमजोरअभी पूरा आसमान बाकी है गिरकर …

जब ख्वाबों में तुम आती हो..(पियुष राज)

🌹👸🏻💓 *जब ख्वाबों में तुम आती हो…*💓👸🏻🌹कल मैंने ख्वाबों में देखातुम मेरे पास हो आईहाथ पकड़कर मेरा तुमसाथ निभाने की कसमें खाईजब तेरे पास था मैं तोतुम मुझसे दूरी …

राख…(पियुष राज)

राखधन दौलत के अभिमान मेंइंसान हो जाता है मगरूरअपने आप को बड़ा समझकरअपनो से ही हो जाता है दूरमरने के बाद धन-दौलतसब कुछ हो जाता है खाकअंत मे जिंदगी …

भक्तों पर हमला……

अमरनाथ यात्रियों पर हुए हमले पर आक्रोश व्यक्त करती मेरी कविता* ????????महाकाल के दर्शन करने गए थे जोवे ही खुद काल के मुंह मे समा गएक्या थी उनकी गलती …

अब इस दुनिया में रिश्ता निभाता है कौन….

इस मतलबी दुनिया में अब याद आता है कौनफुर्सत में भी अब एक-दूजे के घर जाता है कौनअब दूसरों की परवाह नही सब अपने में व्यस्तइस युग में अब …

ग़ज़ल-ये तुम क्यों भूल गए

ग़ज़ल-ये तुम क्यों भूल गएमैंने तुम से प्यार किया था…..ये तुम क्यों भूल गएतुमको सब कुछ मान लिया था ये तुम क्यों भूल गएसुबह थी तुम शाम थी तुम …

माँ के चरणों में चारों धाम….(पियुष राज)

ईश्वर को कहाँ ढूंढे रे बंदेईश्वर ही माँ का दूजा नामवो ही कृष्ण है वो ही राममाँ के चरणों में चारो धाम उसी की गोद में बचपन बीताउसी ने …

एक अजनबी से इतना प्यार क्यों है..-पियुष राज

उस अजनबी से जुदा होने का मुझे मलाल क्यों हैना चाह कर भी हर वक़्त दिल में उसका ख्याल क्यों हैकुछ कसूर तो उसकी अदाओं का भो है मेरी …

कुछ पल मेरे साथ बिताओ तो कभी…-पियुष राज

विधा-ग़ज़लकाफिया-ओरदीफ़-तो कभी*************************चाहती हो मुझे अगर बताओ तो कभीदेख कर मुझको मुस्कुराओ तो कभीयूँ ना तड़पाओ तुम इतना दिल को मेरेहाल-ए-दिल अपना सुनाओ तो कभीदोस्त तो है बहुत पर तुझ …

होली के रंग मोदी के संग…..-पियुष राज

होली के रंग मोदी के संग कही उड़े रंग तो कही उड़े गुलालयूपी में साईकिल का हो गया बुरा हालसाईकिल में बैठकर राहुल ने लगा दी साईकिल में ब्रेकअखिलेश माथा …

शायरी-2 पियुष राज

हुस्न के पीछे भाग रही दुनियाबेनूर चेहरे पर अब फूल नही खिलतेदिल तो एक जैसा है सबका,फिर भीसच्चे मोहब्बत करने वालों कोदिल के किराएदार नहीँ मिलते.. #spiyush Оформить и …

शायरी-1 -पियुष राज

हम तारीख देखकर मोहब्बत का इज़हार नहीँ करते..हम हसीन चेहरा देखकर प्यार नही करते…हम तो फ़िदा है उनकी मासूमियत पर….वरना हम यूँ ही अपना दिल किसी पर कुर्बान नही …

परीक्षा का मौसम…-पियुष राज

Exam Special Poemपरीक्षा का मौसम….सर्दी अच्छी है,गर्मी अच्छी हैबरसात में नहीँ है कोई गमसबका सर है चकराने लगताजब आता है परीक्षा का मौसमपढ़ने का मन नही करतापर फेल होने …

वो रास्ता… पियुष राज

वो रास्ता.. जिस रास्ते से गुजरती थी वोवो रास्ता मुझे उसकी याद दिलाता हैजब भी गुजरता हूं उस रास्ते सेतो उसका चेहरा मेरी आँखों में आता हैऐसा लगता है …

अनमोल है बेटियां…-पियुष राज

अनमोल है बेटियांअगर बेटे हीरा है तोहीरे की खान है बेटियांअपने घर-गांव-देश कीपहचान है बेटियांअगर बेटे सूरज है तोगंगा की अविरल धारा है बेटियांअगर बेटे आसमान है तोउस आसमान …

मेहनत करना सीखो….-पियुष राज

मेहनत करना सीखो…जरुरी नहीँ की सफलताएक बार में हासिल होपहले तुम देखोतुम कितना उसके काबिल होबार-बार असफल होने पर भीना हो कभी निराशकड़ी मेहनत करते जाओऔर मन में रखो …

शायरी -पियुष राज

 हुस्न के पीछे भाग रही दुनियाबेनूर चेहरे पर अब फूल नही खिलतेदिल तो एक जैसा है सबका,फिर भीसच्चे मोहब्बत करने वालों कोदिल के किराएदार नहीँ मिलते… पियुष राज 02/01/2017

नववर्ष की बधाई….-पियुष राज

नववर्ष की बधाई…दुनिया आगे बढ़ती रहीबढ़ती रही समय की चालखट्टी-मीठी यादों के साथबीत गया यह साल…कुछ पाया ,तो कुछ खोयाकभी हँसा ,तो कभी रोयाअच्छे-बुरे दोनों वक़्त आएपर धैर्य कभी …