Author: pallavi laghate

माँ

कभी नदी सी विशाल ह्रदय की ,कभी धरती सी सहनशील, ममता का भंडार है, माँ , रचा उसे ईश्वर ने ऐसे धरती पर जैसे स्वर्ग है ,माँ दर्द छुपा …