Author: Nityapushta

आइना

तू एहसास है में इंसान हूँ तू प्रतिबिम्ब है में कर्म हूँ तू टूटकर बिखरता है में टूटकर उभरता हूँ तू दर्शाता आज है में सोचता भविष्य हूँ तू …